रोना विल्सन: एल्गर मामले में अस्थायी जमानत मिली


 जून 2018, में एल्गर परिषद मामले के आरोप में गिरफ्तार रोना विल्सन को एनआईए की विशेष अदालत ने पिता के निधन के बाद पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 15 दिनों की अस्थायी जमानत की मंजूरी दी.

मंगलवार को एनआईए की विशेष अदालत ने भीमा कोरेगांव (एल्गर परिषद) मामले में सजा काट रहे रोना विल्सन को पिता की मृत्यु के 30 दिन बाद आयोजित होने वाली अंतिम रिवाजों में हिस्सा लेने के लिए अस्थाई मंजूरी दे दी है| उनके पिता का पिछले महीने केरल में उनके घर पर निधन हो गया था.

विल्सन, जो एक कैदियों के अधिकार कार्यकर्ता है, 2001 के संसद हमले के झूठे आरोप में मौत की सजा पाए सैयद अब्दुल रहमान गिलानी को आरोप मुक्त कराए थे.

वर्तमान में रोना विल्सन न्यायिक हिरासत में है और नवी मुंबई के तलोजा जेल में बंद है

विल्सन के वकील नीरज यादव ने एनआईए अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के पिता को 18 अगस्त 2021, को निधन हो गया था और उन्हें अगले ही दिन दफना दिया गया था. विल्सन ने मानवीय आधार पर जमानत मांगी ताकि वे अपने परिजनों से मिल सके और परिवार द्वारा चर्च में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो सकें, अगर उन्हें अपने परिवार से मिलने दिया जाता है तो इससे उन्हें 'शांति' मिलेगी.

हालांकि एनआईए ने उनकी जमानत अर्जी का विरोध किया था लेकिन विशेष न्यायाधीश डीई कोठालीकर ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें 13 सितंबर से 27 सितंबर तक आंतरिक जमानत दे दी और कहा कि विल्सन को केरल में उनकी यात्राओं और ठहरने संबंधी जानकारी एनआईए अधीक्षक को देनी होगी और साथ ही 14 और 24 सितंबर को स्थानीय थाने में उपस्थित होना होगा. केरल के कोल्लम में स्थित अपने गृह स्थान नंदीकारा से बाहर नहीं जाना चाहिए और जमानत विस्तार का आग्रह मंजूर नहीं किया जाएगा, साथ ही उन्हें उनका पासपोर्ट सौंपने और केरल से बाहर नहीं जाने को कहा.

फरवरी 2021 में द वायर ने एक अमेरिकी डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसलटिंग के कुछ निष्कर्षों का खुलासा किया था फर्म ने कहा था कि रोना विल्सन को नई दिल्ली से गिरफ्तार किए जाने से कम से कम 22 महीने पहले उनके लैपटॉप से छेड़छाड़ की गई थी और एक साइबर हमलावर ने कथित तौर पर कम से कम 10 आपत्तिजनक पत्र उनके लैपटॉप में डाले थे इसके आधार पर विल्सन ने बांबे हाईकोर्ट में उनके अभियोजन को चुनौती दी है

विल्सन को पुणे पुलिस ने एल्गर परिषद मामले की जांच के दौरान जून 2018 में गिरफ्तार किया था पुलिस ने आरोप लगाया था कि एल्गर परिषद की सभा का आयोजन करने के एक दिन बाद एक जनवरी 2018 को पुणे के बाहरी इलाके भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़क उठी थी, जिससे पुणे पुलिस ने विल्सन समेत अन्य कई आयोजन कर्ताओं पर मामला दर्ज किया था पुणे में एल्गर परिषद की बैठक में भड़काऊ भाषण एवं उत्तेजक बयान दिए गए थे जिससे अगले दिन भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी.

पुलिस के मुताबिक कार्यक्रम को माओवादियों का भी समर्थन हासिल था बाद में एनआईए ने जांच को पुणे पुलिस से अपने हाथों में ले लिया

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